'10 दिन के इलाज का ₹16 लाख का बिल — 70% ज़्यादा वसूली'
WhatsApp पर अपने बिल की फोटो भेजें। हम हर लाइन को सरकारी रेट से मिलाते हैं और बताते हैं कि कौन-से चार्ज ज़्यादा हैं — और अब आपको क्या करना चाहिए।
ज़्यादातर जांच कुछ घंटों में पूरी। लॉन्च के दौरान कोई शुल्क नहीं।
कोई ऐप नहीं। कोई फॉर्म नहीं। सिर्फ WhatsApp — जो आप पहले से इस्तेमाल करते हैं।
अपने अस्पताल के बिल की फोटो खींचकर WhatsApp पर BillOkay को भेज दें। बस इतना ही।
हमारी टीम हर प्रोसीजर, दवा और सामान की कीमत को CGHS, NPPA, PMJAY, GIPSA और AIIMS के सरकारी रेट से मिलाती है। ज़्यादा वसूली, दोहरी एंट्री और फर्जी आइटम पर निशान लगाती है।
आपको मिलती है पूरी जांच रिपोर्ट — ओवरचार्ज की सही रकम, सरकारी रेट के हवाले, तैयार आपत्ति पत्र और बातचीत के लिए कदम-दर-कदम सलाह।
असली, दर्ज मामले — खबरों, अदालत के आदेशों और उपभोक्ता मंचों से।
'10 दिन के इलाज का ₹16 लाख का बिल — 70% ज़्यादा वसूली'
'जून 2024 का नया कानून: अस्पतालों को आइटम-वार बिल देना होगा, वरना जुर्माना'
'दिल्ली के अस्पताल पर ₹5.6 लाख का जुर्माना — एक सर्जिकल आइटम पर 480 गुना दाम वसूला'
'निजी अस्पताल ने डेंगू के इलाज के ₹18 लाख लिए, AIIMS में वही इलाज ₹3.5 लाख का था'
क्या आपके हाथ में भी ऐसा ही बिल है?
मेरा बिल जांचेंअपने दस्तावेज़ WhatsApp पर भेजें। बदले में तीन चीज़ें मिलती हैं।
लाइन-दर-लाइन नतीजे: बढ़े हुए रेट, दोहरी एंट्री, ऐसे आइटम जिनका बिल बनना ही नहीं चाहिए — हर एक के बगल में सरकारी रेट।
आपके असली आंकड़ों और उनके पीछे के नियमों के साथ लिखा हुआ। आप इसे बिलिंग काउंटर पर देते हैं।
बातचीत के मुख्य बिंदु और शिकायत का रास्ता — बिलिंग काउंटर, शिकायत अधिकारी, उपभोक्ता मंच — आपकी स्थिति के हिसाब से।
सरकार की अपनी रेट सूचियों — CGHS, NPPA, PMJAY — से मिलान, वही पैमाने जो अदालतें इस्तेमाल करती हैं। आपका बिल एन्क्रिप्टेड रहता है, भारत में ही रहता है और जांच के बाद मिटा दिया जाता है। DPDP कानून का पालन।
अपनी स्थिति चुनें। हर स्टेज पर दस्तावेज़ जुड़ते जाते हैं — अभी क्या नया चाहिए, और पहले से क्या आपके पास होना चाहिए। जो मिल जाए वही भेज दें; जितने ज़्यादा दस्तावेज़, उतनी सटीक जांच।
शुरू करने का सबसे अच्छा समय — ज़्यादातर ओवरचार्ज होने से पहले ही रोके जा सकते हैं।
साथ-साथ जमा करते चलें — जब तक आप वहां हैं, गलतियां सुधारना सबसे आसान है।
इस स्टेज पर नया:
साथ में, भर्ती से पहले के दस्तावेज़ (अगर हों):
पैसा चुकाने से पहले ये भेज दें — डिस्चार्ज के इंतज़ार वाली जांच हम सबसे पहले करते हैं।
इस स्टेज पर नया:
साथ में, अब तक जमा किया हुआ सब (जो भी हो):
अभी भी पैसा वापस मिल सकता है — दबाव में पैसा भर देने से आपके हक़ खत्म नहीं होते।
इस स्टेज पर नया:
साथ में, पिछली स्टेज का सब कुछ (जो भी हो):
कुछ दस्तावेज़ नहीं हैं? जो है वही भेज दें — हम बताएंगे कि अस्पताल से और क्या-क्या मांगना है। पूरी गाइड: हर स्टेज पर क्या जमा करें।
जो सवाल आपके मन में चल रहे हैं — सीधे जवाब।
किसी से बहस करने से पहले, हमसे शुरू करें। जो दस्तावेज़ हैं वे WhatsApp पर भेज दें — नीचे का चेकर बताता है कि आपकी स्टेज पर कौन-से दस्तावेज़ ज़रूरी हैं। फिर जब आप बिलिंग काउंटर से बात करेंगे, तो आपके पास सही आंकड़े होंगे, सिर्फ अंदाज़ा नहीं।
ज़्यादातर जांच कुछ घंटों में आ जाती है — अधिकतर बिलों के लिए उसी दिन। अगर आप डिस्चार्ज का इंतज़ार कर रहे हैं, तो हमें बताएं; ऐसे मामले हम सबसे पहले देखते हैं।
लॉन्च के दौरान कुछ नहीं। न कार्ड, न साइनअप। कीमतों की जानकारी हम बाद में देंगे — अभी जो भी भेजेंगे, उस पर कोई शुल्क नहीं।
आपका बिल एन्क्रिप्टेड रहता है, भारत के सर्वर पर ही रहता है और जांच के बाद मिटा दिया जाता है। हम इसे कभी किसी अस्पताल या बीमा कंपनी से साझा नहीं करते। मिलान सरकार की अपनी रेट सूचियों से होता है — वही पैमाने जो अदालतें इस्तेमाल करती हैं।
आपत्ति पत्र बिलिंग काउंटर को दें — उसमें सही रेट और नियमों के हवाले होते हैं। अगर वे न मानें, तो यही रिपोर्ट हर अगले कदम पर काम आती है: शिकायत अधिकारी, बीमा कंपनी, उपभोक्ता मंच।
डिस्चार्ज के दबाव में पैसा भर देने से आपके हक़ खत्म नहीं होते — भरने के बाद भी आप आपत्ति करके पैसा वापस पा सकते हैं। पर हो सके तो पैसा चुकाने से पहले बिल हमें भेज दें।
WhatsApp पर BillOkay को अपने अस्पताल के बिल की फोटो भेजें। हमारी टीम हर लाइन पढ़ती है, उसे सरकारी रेट (CGHS, NPPA, PMJAY) से मिलाती है, ज़्यादा वसूली पर निशान लगाती है और आपको पूरी जांच रिपोर्ट भेजती है — साथ में बातचीत के लिए कदम भी।
CGHS 2025 रेट (4,000+ प्रोसीजर), NPPA की अधिकतम कीमतें (900+ दवाएं), PMJAY पैकेज रेट (1,578 प्रोसीजर), GIPSA बीमा रेट और AIIMS के संदर्भ रेट।
लॉन्च के दौरान BillOkay कोई शुल्क नहीं ले रहा है। हमारी टीम WhatsApp पर हर बिल खुद जांचती है। कीमतों की जानकारी आगे चलकर, चरणबद्ध लॉन्च के साथ दी जाएगी।
नहीं। BillOkay किसी अस्पताल, बीमा कंपनी या सरकारी संस्था से आपकी ओर से न संपर्क करता है, न बातचीत करता है, न आपकी पैरवी करता है — पत्र और शिकायतें आपके नाम से जाती हैं और आप ही भेजते हैं। जांच के बाद आपको मिलते हैं बातचीत के मुख्य बिंदु, सरकारी रेट के हवाले और तैयार आपत्ति पत्र, जिसे आप खुद अस्पताल के बिलिंग विभाग को दे सकते हैं।
नहीं। BillOkay पूरी तरह WhatsApp पर चलता है — वही ऐप जो 90 करोड़ भारतीय पहले से इस्तेमाल करते हैं। न डाउनलोड, न साइनअप, न पासवर्ड।
अभी WhatsApp पर अपने बिल की फोटो भेजें — या अपना नंबर छोड़ दें, हम आपको मैसेज करेंगे।
WhatsApp पर मैसेज करें🔒 हम आपको WhatsApp पर मैसेज करेंगे। कोई स्पैम नहीं।
अगर बिल अभी तैयार है, तो सीधे WhatsApp पर हमें मैसेज कर दें।
We'll remember your choice for next time.
We've saved your preference — that language is on its way. The site is in English for now.